चक्रधर नगर में ओवर ब्रिज बने या अंडर ब्रिज चांद में दाग तो लगेगा ही

प्रिय पाठको, रायगढ़ का सफरनामा के साथ रायगढ़ की यात्रा में आपका स्वागत है…

चक्रधर नगर में ओवर ब्रिज बने या अंडर ब्रिज चांद में दाग तो लगेगा ही

चक्रधर नगर रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से बचने के लिए वर्षों से विचार विमर्श किया जा रहा है।  लेकिन प्रशासन और रेलवे के सारे विचारवान लोग घूम फिर कर यहाँ ओवरब्रिज बनाने पर अटक जाते हैं । दो-तीन ड्राइंग डिजाइन भी बनी परंतु हर बार कोई ना कोई कारण बना और यह विलंबित होता चला गया।

लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन ने गेंद रेलवे के पाले में डाल दी है और अब नये ताजा सर्वे के अनुसार यहां पर आरओबी यानि ओवर ब्रिज की जगह आरयूबी यानि अंडर ब्रिज बनने पर सहमति बन गई है। और उसका ड्राइंग डिजाइन भी तैयार कर लिया गया है , यह अंडर ब्रिज रायपुर के गुढ़ियारी की तर्ज पर बनाया जाएगा और इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा और पहले से ही प्रीकास्ट दीवाल छत और फर्श बनाकर लगा दिया जाएगा ताकि इस रूट के रेल आवागमन पर अधिक असर ना हो।

यहां तक तो बात सबके गले से उतरती है परंतु जब हम उसके बनने की प्रक्रिया को आरंभिक बिंदु से देखना शुरू करते हैं तो इसे फिर से इस प्रकार से निर्मित करने का की योजना बनाई गई है कि इसके दोनों सिरे चाहे वह चक्रधर नगर से आ रहा हो या फिर पॉलिटेक्निक से चक्रधर नगर की ओर जा रहा हो यह दोनों काफी दूर से डिजाईन किये जा रहे हैं ताकि उसका लेवल बनाया जा सके। इस अंडर ब्रिज में खर्च तो कम आएगा परंतु ब्रिज के दोनों और सर्विस रोड बनाने के चक्कर में तोड़फोड़ भी बहुत होगी।  सर्विस रोड का मतलब जैसा कि हम रामनिवास टॉकीज ओवरब्रिज के दोनों तरफ देखते हैं ठीक उसी तरह आरयूबी में भी दोनों तरफ सर्विस रोड बनती है ताकि जो लोग ब्रिज का इस्तेमाल न करना चाहे तो सर्विस रोड से इधर-उधर जा सकते हैं।

हम कल्पना करें तो दोनों ही परिस्थितियों में एक बहुत ही खुले हुए और रायगढ़ के सबसे खूबसूरत क्षेत्र को वापस गलियों में तब्दील किया जाना तय है । चक्रधर नगर क्षेत्र रायगढ़ का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां पर पहुंचने के बाद आपको लगता है कि आपके साथ-साथ रायगढ़ नगर माता भी सांस ले रही है और उसका दिल भी धड़क रहा है । लेकिन अब हम उसके धड़कते दिल पर अपनी जिद और अपनी अकर्मण्यता का बोझ कांक्रीट के रूप में डालने जा रहे हैं।

समझ में यह नहीं आता की आखिर उसी स्थान पर आरयूबी या आरओबी बनाने की जरूरत क्यों है उसे आगे पीछे क्यों नहीं किया जा सकता और फिर कोतरा रोड से चक्रधर नगर तक कुल 5 किलोमीटर के अंदर अंदर दो आरओबी  और चार आरयूबी  बनाने की जरूरत ही क्यों है ? जबकि आने वाले दिनों में रिंग रोड प्रस्तावित है और उसमें भी एक आरोबी बनना तय है तो शहर में ज्यादा पुल पुलिया बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है ?

अब अगर हम गौर से देखें तो चाहे आरोबी हो या आरयूबी इसका फायदा केवल वाहन चालकों को ही मिलेगा, पैदल, सायकल ,ठेला, रिक्शा उपयोग करने वाले लोग इसका फायदा नहीं उठा पाएंगे क्योंकि उनके लिए उतरना तो आसान होता है लेकिन चढ़ना बहुत कठिन होता है।  हर उस व्यक्ति को जो इस प्रकार की कवायद को समर्थन करते हैं वह एक बार पैदल सायकल  रिक्शा या ठेला चलाते हुए किसी भी आरोबी या आरयूबी का उपयोग करके अवश्य देखें।

अब मामला केवल जन भावनाओं का है यदि रायगढ़ की जनता एक खूबसूरत और खुले स्थान को शहर की तरह तंग गलियों में तब्दील करना चाहती है तो वह इसका समर्थन करे। अन्यथा शासन प्रशासन और भारत सरकार को एक-एक पोस्टकार्ड लिखकर चक्रधरनगर में इसकी अनुपयोगिता बताते हुए इसका स्थान आगे बदलकर कर विकसित होने वाले बाल समुद्र के आसपास करने की सलाह प्रदान करें।

यह ज्ञात है कि हमारे माननीय विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी जी बाल समुद्र के आसपास बहुत ही खूबसूरत और विकसित पिकनिक स्पॉट बनाना चाहते हैं ताकि यह इलाका श्री हनुमान मंदिर के साथ-साथ रायगढ़ का एक और दर्शनीय स्थल बन जाए ऐसे में आरयूबी इस इलाके में होना उसे अधिक सुंदर और सुविधाजनक बनाएगा।

वर्तमान में शहर का फैलाव इसी ओर  हो रहा है चाहे वह सीनियर सिटीजन के लिए विजयपुर में वैलनेस सेंटर हो या फिर रेलवे के दूसरी ओर अर्बन औद्योगिक पार्क, यहां  तीन बड़ी कॉलोनिया और लगभग 10 छोटी कालोनियाँ भी आकार ले रही है।  और यह इलाका सुरक्षित, खूबसूरत, हरा-भरा, और प्रकृति से रूबरू होता हुआ विकसित हो रहा है इसीलिए आर यू बी चक्रधर नगर पर नहीं बल्कि बाल समुद्र के आसपास बनाना चाहिए।

चलते चलते…….

जिला प्रशासन और नगर प्रशासन के पूरी मेहनत के बाद भी हम सभी बारिश के मौसम में अव्यवस्थित बने ड्रेनेज सिस्टम की मार झेल रहे हैं।

बारिश के कुछ दिनों में ही नई बनी सड़कों पर भी गड्ढे पड़ रहे हैं।

विद्युत की इतनी लचर व्यवस्था है कि ऐसा लगता ही नहीं कि हम जो कोयले की डस्ट से अपना जीवन बर्बाद करते हुए बिजली बनाकर पूरे देश को दे रहे हैं वह कहीं से भी सार्थक है । हम अपने जीवन के 10-10 साल कम करते हुए अपने उम्र की आहुति दे रहे हैं पर फिर भी हमें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है जो न केवल अन्याय है बल्कि अनीति पूर्ण है। और उस पर भी बढ़ता हुआ बिजली का बिल लोगों के होश ठिकाने लगा रहा है।

हीरा मोटवानी
Author: हीरा मोटवानी

frontfacenews@gmail.com

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