रायगढ़ के राजनीति में होगी एक नये अध्याय की शुरुआत

 रायगढ़ के राजनीति में होगी एक नये अध्याय की शुरुआत

रायगढ़। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी एक लंबा समय बाकी है। परंतु रायगढ़ में बढ़ती सियासी हलचल यह बता रही है कि 2028 के चुनाव के लिए संबंधित पक्षों द्वारा चुनावी तैयारी शुरू कर दी गई है। फिर चाहे वह सत्ता पक्ष की ओर से ताबड़तोड़ घोषणाएं और लंबित विकास कार्यों को जल्दी पूरा करने की होड़ हो,या फिर विपक्ष द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर की जा रही तगड़ी बयान बाजी और लगातार प्रदर्शनों का दौर।

इसी बीच फ्रंट फेस न्यूज़ की निगाह एक शख्स पर पड़ी जो धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। जिसके नाम की चर्चा स्वत: ही राजनीति के गलियारों में गूंजने लगी है।

जी हां हम बात कर रहे हैं रामचंद्र शर्मा की जो स्वयं में एक निशुल्क कोचिंग केंद्र हैं , मोटिवेशनल स्पीकर है, खिलाड़ी हैं , शिक्षाविद है,  दैनिक समाचार पत्र क्रांतिकारी संकेत के संपादक हैं और प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा रह चुके हैं। इसलिए वर्तमान में राजनैतिक सिस्टम को बहुत अच्छे तरीके से समझते हैं। रायगढ़ के आम जनमानस में यह चर्चा  काफी जोर पकड़ चुकी है कि रामचंद्र शर्मा रायगढ़ के ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए तथा शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाते हुए अब सक्रिय राजनीति में पदार्पण की दहलीज पर खड़े हो चुके हैं।

रामचंद्र शर्मा न केवल शहर के प्रबुद्ध नागरिकों में शुमार है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी किसी परिचय का मोहताज नहीं है।
अब शहर में इस चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया है की क्या राम चन्द्र शर्मा के आने से रायगढ़ विधानसभा के राजनीति में एक नये अध्याय की शुरुआत होगी।।
हालांकि बुद्धिजीवियों के मन में एक आशंका है कि क्या रामचंद्र शर्मा वर्तमान व्यवस्था को टक्कर दे पाएंगे क्योंकि आज की राजनीति में सिद्धांतों को बताने और समझाने के लिए भी धन की आवश्यकता होती है और यह धन छोटा-मोटा नहीं  बल्कि एक बड़ा आंकड़ा होता है ऐसे में जबकि चुनाव अभी 2 वर्ष दूर है तो क्या तब तक यह अपने अभियान को गति दे पाएंगे। परंतु उन्हें यह नहीं भूलना  चाहिए की रामचंद्र शर्मा एक कलमकार है और उनके पास अपनी अभिव्यक्ति के लिए प्रेस का सशक्त माध्यम भी है जो लोकप्रिय जननेता स्वर्गीय रोशन लाल अग्रवाल के पास भी था।

सत्तारूढ़ दल के नेता और कार्यकर्ता यह सोच रहे हैं की 65000 की एक बड़ी खाई को पाटना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।  वह भी तब जब प्रदेश के कई जिलों को छोड़कर विकास केवल रायगढ़ में ही क्रीड़ारत है, वह केवल रायगढ़ में ही दिख रहा है और रायगढ़ वासियों को ही बहुत सारी सुविधाएं प्राप्त होने वाली हैं ।

दूसरी तरफ विपक्षी दल में कई कद्दावर नेता टिकट के लिए लाइन लगाए खड़े हैं।  वहां गला काट स्पर्धा है ऐसे में यदि किसी को टिकट नहीं मिलती है तो वह बागी होकर अंदर ही अंदर पार्टी को नुकसान पहुंचाता है।  वह एक छिपा हुआ प्रतिद्वंदी होता है।  तब क्या रामचंद्र शर्मा अपने समर्थकों, खिलाड़ियों ,विद्यार्थियों और शिक्षकों के भरोसे आगे बढ़कर कोई कमाल दिखा पाएंगे?

यह तो वक्त के गर्भ में है । पर जनचर्चा की आवाज सभी को सुनाई दे रही है और अब उसका वॉल्यूम भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।  हालांकि यह कहा जाता है कि पुरुष के भाग्य को कोई नहीं जानता समय कब कहां कैसे उसे सफलता के शिखर तक पहुंचा दे या फिर किसी को कब कहां कैसे धरातल पर ला खड़ा करे यह कहा नहीं जा सकता।

इंतजार करिए समय के साथ तस्वीर भी साफ होने लगेगी..

ऐसा क्यों होता है…..

रायगढ़ ऐसा क्यों होता है कि प्रतिवर्ष जन्माष्टमी का मेला आरंभ होते समय और खत्म होते समय (जिसमें मीना बाजार भी शामिल है) अचानक चोरी, छिनताई, पॉकेट मारी, मारपिटाई, वाहन चोरी, की घटनाएं बढ़ जाती हैं तो आपका जवाब होगा कि बाहरी लोग आते हैं और अपराध करके निकल जाते हैं । आपका जवाब 50% सही हो सकता है क्योंकि ऐसा भी होता है परंतु 50% घटनाएं स्थानीय अपराधियों द्वारा की जाती है क्योंकि उन्हें पता है कि पुलिस लॉ एंड ऑर्डर और ट्रेफिक ड्यूटी में लगी है लोग त्योहार में व्यस्त हैं और अपराधों के होने पर उसका पूरा शक बाहरी व्यक्ति पर ही जाएगा। और पुलिस भी आदतन अपराधियों की ही धरपकड़ करेगी।  और फिर कहावत भी है कि मार के आगे भूत भी नाचते हैं।  तो वे लोग स्वीकार भी कर लेते हैं।  इसलिए जब भी कोई अपराध आपके साथ घटित हो तो आप अपने आसपास की जांच का दायरा भी बनाए रखें।  ताकि सही अपराधी पकड़ में आए, हर जगह पुलिस उपस्थित नहीं हो सकती इसलिए सीसीटीवी कैमरे अवश्य लगवाएं ताकि अपराध होने पर आप स्वयं भी उसकी जांच पड़ताल कर सके उसका डीवीआर सुरक्षित जगह पर रखें और उसे अपने घर के सभी फोन कनेक्टर रखें । कोई ना कोई सदस्य उसे देखकर बाकी सदस्यों को सूचित कर सकता है घर के सभी फोन का एक व्हाट्सएप ग्रुप अवश्य बनाएं ताकि सूचना डालते ही तब तक पहुंच जावे।

चलते चलते…

यदि सड़कें सकरी रहे और ट्रैफिक बढ़ता रहे तो बिना तोड़फोड़ किए इस समस्या का हल कैसे निकाला जा सकता है? निश्चित ही इसका उपाय वैकल्पिक मार्ग का निर्माण ही होगा।  अतः वैकल्पिक मार्ग शहर के भीतर कहां से कहां तक बने और ट्रैफिक को किस तरह परिवर्तित किया जावे।  इस विषय पर शहर वासियों से सुझाव आमंत्रित हैं ताकि अगले अंक में कुछ अच्छे सुझावों को शासन स्तर पर पहुंचाने का काम किया जा सके। कृपया अपने सुझाव व्हाट्सएप नंबर 9826177486 पर फोटो एवं नाम के साथ भेजें जिन्हें हम प्रकाशित भी करेंगे और माननीय मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री ,एवं नगरीय निकाय मंत्री  तक भी पँहुचायेंगे ।

हीरा मोटवानी
Author: हीरा मोटवानी

frontfacenews@gmail.com

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