एक कदम पर स्क्वायर फिट दर और दूसरा कदम पड़ते ही हेक्टेयर दर पर मूल्यांकन
किसानों को पहले की अपेक्षा कम मुआवजा मिल रहा है
रायगढ़। कभी-कभी शासन प्रशासन में बैठे लोग इस तरह के निर्णय ले लेते हैं कि जनता हतप्रभ रह जाती है। ऐसा ही एक निर्णय विगत दिनों गाइडलाइन रेट के बढ़ने का था जो लोगों को नागवार गुजरा और उन्होंने इसका भारी विरोध किया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक जिले से फिर से मूल्यांकन पर प्रतिवेदन मांगा गया था परंतु प्रशासन ने जो त्रुटियां पहले की थी वही त्रुटि फिर से दोहरा दी है।
पहले नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत से सटे हुए गांव में एक निश्चित सीमा तक भूमि का मूल्यांकन वर्ग मीटर दर पर किया जाता था ,उसके बाद उसे हेक्टेयर दर पर मूल्यांकित किया जाता था। क्योंकि मुख्य मार्गो से लगी हुई भूमियां महंगी हो चुकी है भले ही वे अभी नगर निगम में नहीं है पर अगले परिसीमन में वे नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आ जाएगी यहां तक की उन गांव में बहुत सी रहवासी कालोनियां भी कट चुकी होती हैं, अस्पताल स्कूल सब बन गए होते हैं वो शहर ही होता है पर सरकारी रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत। कहीं-कहीं तो आधा गांव निगम में और आधा गांव ग्राम पंचायत में आता है।
अब शासन ने यह निर्णय लिया कि जो भूमि कॉलोनी के अंदर है उसका मूल्यांकन वर्ग फिट दर से किया जाएगा और जो कॉलोनी से बाहर है उसका मूल्यांकन हेक्टेयर दर पर किया जाएगा। इस पूरी कवायद का जो निष्कर्ष निकला उसके अनुसार पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो चुका है और आने वाले दिनों में भी होता रहेगा। दूसरी तरफ ऐसे लोग जिनकी भूमि अनिवार्य भू अर्जन में जा रही है उन्हें बहुत कम रेट से मुआवजा दिया जाएगा। क्योंकि उनका मूल्यांकन वे हेक्टेयर दर पर करेंगे। जबकि छत्तीसगढ़ शासन का यह दावा था कि जो मूल्यांकन दर बढ़ाई जा रही है वह किसानों के हित में होगी परंतु कई जगह पहले के रेट से किसानों को ज्यादा मिल रहा था अब की रेट से उन्हें कम मुआवजा मिल रहा है ।
अब देखने वाली बात यह है कि नगर निगम की सीमा जहां समाप्त होती है वहां पर जो आपका आखरी कदम पड़ता है वहां पर भूमि का मूल्यांकन वर्ग मीटर दर यानी स्क्वायर फीट दर पर किया जाएगा लेकिन अगला ही कदम जिस भूमि पर पड़ेगा उसे ग्राम पंचायत मानते हुए उसी मार्ग पर उसका मूल्यांकन हेक्टेयर दर पर होगा। इस अन्याय के खिलाफ जो लोग भी अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं उन्हें दबाया जा रहा है और तरह-तरह के हथकंडे अपना आकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। जैसे किसी भी मार्ग का चौड़ीकरण बीच सड़क से आधा इधर और आधा उधर किया जाता है परंतु जो लोग इस भू अर्जन में मुआवजे की खिलाफत कर रहे हैं उनके साथ सिर्फ एक तरफा ही सड़क बढ़ाते हुए उनकी पूरी जमीन को अधिग्रहित किया जा रहा है। जबकि दूसरी ओर एक इंच जमीन भी अधिग्रहित नहीं हो रही है। जिससे उनकी जमीन जो की स्क्वायर फीट दर पर बिकती वह अब हेक्टेयर दर पर मूल्यांकित करते हुए मुआवजा बनेगा।
आखिर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ लोगों का इतना नुकसान कैसे कर सकते हैं । यह एक सोचनीय विषय है फिर भी यह जानते बुझते कि यह अन्याय है प्रशासनिक टीम दबी हुई आवाज में यह कहते हुए नजर आ रही है कि उन्हें जैसा आदेश मिल रहा है वह वैसा ही कर रहे हैं। उनकी तो मजबूरी है, पर अब इस त्रुटि को कौन सुधारेगा । क्या प्रशासनिक त्रुटि के कारण किसी किसान या भूमि मालिक का बड़ा नुकसान उचित है। अब पीड़ित लोग अपने साथ हुए अन्याय के लिए किसके पास जायें । पीड़ित पक्षकारों ने कहा कि अब उनके पास न्यायपालिका के समक्ष गुहार लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है ।



