अपनों से अपनी बात ……………..
फ्रंट फेस न्यूज़ के पाठकों का हार्दिक अभिनंदन। लगभग 37 साल की पत्रकारिता यात्रा के दौरान मैंने बहुत से संस्थाओं के साथ काम किया जिसमें प्रिंट मीडिया, न्यूज़ एजेंसी, आकाशवाणी, दूरदर्शन, इंडिया टीवी, इंडिया न्यूज़, जैसे चैनल शामिल हैं । उम्र के इस पड़ाव में शौक को पूरा करने के लिए मैंने भी एक न्यूज़ पोर्टल बनवा लिया है, परंतु मैं उसमें बहुत सक्रिय नहीं हूं । परंतु इधर कुछ दिनों से मैंने यह महसूस किया कि जब आप मेन स्ट्रीम से बाहर हो जाते हैं तो लोग आपको तवज्जो देना बंद कर देते हैं उन्हें ऐसा लगता है कि आप तो रिटायर हो गये । वह यह नहीं जानते कि पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता, मेरी लेखनी में ताकत है तो मेरे विचार आज भी बुलंदियों पर ही रहेंगे। लोग उसे पढ़ेंगे और अपनी प्रतिक्रिया भी देंगे । मैंने अपने एक पुराने मित्र से जब वस्तु स्थिति बयान की तो उसने कहा की हीरा भाई यह दुनिया बड़ी खराब है यदि आप सीधे हैं तो सबसे पहले कटेंगे , आप बीमार हैं तो मक्खी मच्छर भी आपको परेशान करेंगे। आप शांत है तो अनपढ़ भी आपके सिर पर नाचेंगे और यदि आप खामोश है तो एक अदना व्यक्ति भी आपको चार बातें सुना कर चला जाएगा इसलिए भले ही आप अपने व्यवहार के अनुसार किसी का बुरा न करें परंतु यदि कोई चुनौती दे तो ताल ठोक कर मैदान में आना ही पड़ेगा। बस उनके इस वाक्य को मैंने आज बहुत मनन किया और यह निश्चय किया कि हर छोटी बड़ी घटना पर तो नहीं पर ऐसी घटनाओं पर जिसमें लोकहित ,जनहित और मेरे व्यक्तिगत अधिकारों पर यदि बाहरी हस्तक्षेप होता है तो मुझे आगे आना होगा । इसलिए मैंने आज से एक नया कॉलम अपने पोर्टल में शुरू किया है, आशा है मेरे पुराने कॉलम जो प्रतिष्ठित अखबार केलो प्रवाह में नगर परिक्रमा और जनकर्म में कही- अनकही के नाम से आता था यह भी उसी तरह आपको पसंद आएगा। मैं आपसे भी कह रहा हूं कि ऐसे मामले जिसमें जनता का हित हो और आपकी आवाज को कोई प्लेटफार्म न मिल रहा हो तो आप मेरे इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। आज पहली बुलेटिन है इसलिए ज्यादा नहीं लिखूंगा सिर्फ दो-तीन बातों पर आपका ध्यान आकर्षित करता हूं….
बिहार की तर्ज पर हो राज्य की वेबसाइट पर अवैध कब्जे की शिकायत
रायगढ़ में अवैध कब्जों की भरमार है फिर वह चाहे शासकीय भूमि हो निजी भूमि हो सब पर भू माफिया हावी है। बिना किसी संरक्षण के इतनी हिम्मत किसी में नहीं होती जाहिर है कि कोई ना कोई नेता या अधिकारी इन्हे शह दे रहा है। सभी जानते हैं कि कौन किसका आदमी है परंतु नेता की अपनी मजबूरी है कि उसे हर प्रकार के लोग चाहिए और अधिकारी को पैसा चाहिए। लेकिन घबराइए मत यहां देर है पर अंधेर नहीं। यदि आप अपने प्रकरण को स्वयं ध्यान देंगे तो आपका अधिवक्ता भी आपकी मदद कर पाएगा परंतु यदि आप केवल गाल बजाएंगे तो अधिवक्ता भी आपको बड़ी मदद नहीं कर पाएगा। कागजात इकट्ठे करना प्रॉपर लाइन पर चलना यह आपको अपने दिन प्रतिदिन के काम में शामिल करना होगा। बिहार राज्य जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार है वहां पर मुख्यमंत्री ने बाकायदा अपने शासकीय पोर्टल पर एक विशेष डिजिटल रजिस्टर की व्यवस्था की है। जहां पर आप अपने शिकायत को दर्ज करते हैं, और कब्जे संबंधी सारे कागजात को अपलोड करते ही एक महीने के अंदर अंदर आपकी भूमि से वह कब्जा हटा दिया जाता है। क्योंकि बिहार सरकार ने यह घोषणा की है कि जो अधिकारी इसमें लापरवाह पाया जाएगा तत्काल सस्पेंड कर दिया जाएगा और यदि इसमें कोई भ्रष्टाचार होता है तो उसे बर्खास्त भी कर दिया जाएगा। मेरी बिहार के मित्रों से बातचीत हुई उनका कहना है कि बिहार सरकार इस मुद्दे को इतनी गंभीरता से लेती है की पोर्टल पर आपकी शिकायत जो कि व्यवहारिक होनी चाहिए जिसमें सबूत होना चाहिए आप दर्ज करते हैं तो उसके तुरंत बाद से ही प्रशासकीय एक्शन प्रारंभ हो जाता है । और स्वयं मुख्यमंत्री इसे मॉनिटर करते हैं। बिहार में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और छत्तीसगढ़ में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है वह इस प्रकार की न्यायिक राहत अपने आम जनता को क्यों नहीं दे सकती, यदि दे सकती है तो उसे तुरंत देना चाहिए । हालांकि विभिन्न जनदर्शन में कार्यवाही होती है पर अधिकारियों पर कोई दंड नहीं होने के कारण लीपापोती भी हो जाती है।
12 साल बेमिसाल
भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय सरकार ने जनता के समक्ष अपने 12 वर्षों का तलपट प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है ।ताकि जनता को सरकार के सारे कार्य जो कि विकसित भारत 2047 की तरफ बढ़ रहे हैं उसकी जानकारी मिल सके। रायगढ़ में बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने आज एक प्रेस वार्ता में विस्तृत रूप से भारतीय जनता पार्टी के उन कार्यों का वर्णन किया जो जनहित में सरकार ने संपन्न किए हैं या कर रहे हैं। पर एक बात समझ में नहीं आई की उन्होंने कहा कि लगभग 25 करोड लोग इन 12 वर्षों में गरीबी रेखा से बाहर आए हैं यदि ऐसा है तो फिर 80 करोड लोगों को राशन क्यों बांटना पड़ रहा है ? और लगभग हर राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत महिलाओं को बहुत सारी सब्सिडी एवं सहायता राशि डायरेक्ट उनके बैंक अकाउंट में क्यों दे रही है? यदि देश में 25 करोड लोग सरकार के प्रयासों से गरीबी रेखा से ऊपर आ चुके हैं तो उनका राशन और उनकी यह सुविधा बंद होनी चाहिए। महतारी वंदन योजना में यह स्पष्ट था की घर का कोई भी सदस्य आयकर दाता है उनके घर की महिलाओं को महतारी वंदन योजना का फायदा नहीं दिया जाएगा परंतु लगभग 30 % लोग ऐसे हैं जो स्वयं भी आयकर दाता है या उनके बच्चे आयकर दाता है लेकिन फिर भी उनके घर में महतारी वंदन योजना का पैसा जा रहा है।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी
जिस राम मंदिर ने भारतीय जनता पार्टी को दो सांसदों से 240 सांसदों तक पहुंचा दिया , पूरे देश की राज्य सरकारों में से अधिकांश स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिस राम मंदिर के दर्शन के लिए पूरे देश के कोने-कोने से स्वयं भारतीय जनता पार्टी स्पेशल ट्रेन चला रही है। उस मंदिर में करोड़ों रुपए के चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया है। जिसमें अब तक लगभग 50 संदेही कार्यकर्ताओं एवं प्रबंधन तंत्र के लोगों को जांच के दायरे में लिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समाचार के लिखने तक करोड़ों रुपए का कैश और इन चोर प्रबंधकों और उनके रिश्तेदारों के नाम से करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी की जानकारी भारत सरकार के सामने आई है। यह बात तो साफ है कि मेरा भारत पहले भी सोने की चिड़िया था आज भी है और कल भी रहेगा बस यह जो लूट मची है यह बंद हो जाए और इन मंदिरों के चढ़ावों को किसी औद्योगिक सीएसआर की तरह जन हिताय जन सुखाय की भावना के साथ अच्छे कामों में लगाया जावे तो देश की काफी समस्याएं कम हो सकती है और शासन का खर्च कम हो सकता है।
चलते चलते ………
संपत्ति कर
आज एक बहुत दिलचस्प बहस चल रही थी की निगम द्वारा जनता से संपत्ति कर लिया जाता है इसमें वह उस संपत्ति पर तो कर लेते ही है जो आपकी अपनी है, परंतु उस संपत्ति पर भी करारोपण करते हैं जो आपकी नहीं बल्कि शासन की खुद की है। जैसे शासन ने आपको पट्टा दिया और आपने उस पर मकान बनाया अब यहां जमीन का मालिक तो शासन ही है और वह भूभाटक के रूप में इसका किराया भी वसूल करता है। यदि वह चाहे तो जनहित में आपको वहां से हटा भी सकता है यानी की संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व शासन का है। आप सिर्फ पट्टेदार हैं, लेकिन उसके बाद भी निगम के संपत्ति कर गणना में भूमि गणना की दर अलग से जोड़ी जाती है ,आपका केवल स्ट्रक्चर है जिसे मलमा कहा जा सकता है आप उस संपत्ति पर कर के देनदार हो सकते हैं परंतु शासन की भूमि का किराया देने के बाद भी आप पर दोबारा संपत्ति करके रूप में करारोपण किया जाये तो यह नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। इस बारे में आपकी क्या राय है मुझे कमेंट में जरूर बताएं……… राम राम



