
करयोग्य आय सीमा और करमुक्त आय सीमा में अंतर
रायगढ़ । यह एक आम धारणा है कि अगर मेरी आय पर कोई देय आयकर नहीं आ रहा है तो मुझे आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है। सुनने में यह तर्कसंगत लगता है कि जब कोई कर नहीं देना है तो कोई फार्म भी क्यों भरा जावे। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सच्चाई यह है कि भले ही आपकी आय पर कर दायित्व नहीं है फिर भी आपको अपना आईटीआर दाखिल करना चाहिए । इस विषय पर मोटवानी फिनसर्व रायपुर के कर सलाहकार रतन मोटवानी ने स्पष्ट किया कि आयकर रिटर्न दाखिल करना उन व्यक्तियों के लिए भी आवश्यक है जो अनिवासी भारतीय हैं पर भारत में उनकी आय करयोग्य आय सीमा से अधिक आई है। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 139 में यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को अधिसूचित नियत तारीख से पहले अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है। अब यहां यह स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है कि कर योग्य आय सीमा अलग है और कर मुक्त आय सीमा अलग है। यह सच है कि किसी व्यक्तिगत करदाता के लिये वित्त वर्ष 2025-26 यानी कर निर्धारण वर्ष 2026-27 में कर मुक्त आय सीमा 12 बारह लाख है। और वित्त वर्ष 2024-25, कर निर्धारण वर्ष 2025-26 के लिए यह कर मुक्त आय सीमा 7 लाख थी। परंतु रिटर्न भरने के लिए कर योग्य आय सीमा पुरानी विधि में 250000/- दो लाख पचास हजार और नई विधि में 300000/- तीन लाख ही है। यानी यदि किन्हीं भी ज्ञात स्रोतों से आपके पास ऐसी कोई आय एकत्रित हो रही है जो कर योग्य है और वह 250000/- एवं 300000/- लाख से ज्यादा है तो आपको रिटर्न अवश्य दाखिल करना है। फिर भले ही कर मुक्त करने के लिए धारा 87 ए का इस्तेमाल किया जाए और आपका आयकर शून्य हो जावे । यदि आप इससे चूक जाते हैं तो आप अनिवार्य विलंब शुल्क के साथ इसे अब भी दाखिल कर सकते हैं। यदि आपकी कर योग्य आय सीमा 5 लाख रुपए से कम है तो 1000 तथा 5 लाख से अधिक है तो 5000 विलंब शुल्क देय है। यदि उसके बाद भी आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको आयकर अधिनियम की धारा 142(1) के तहत आयकर विभाग द्वारा कारण बताओं नोटिस प्राप्त हो सकता है। जिसमें आपसे रिटर्न दाखिल करने और संभावित रूप से अतिरिक्त जानकारी साझा करने के लिए कहा जाएगा। यदि आप निश्चित तिथि तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो फिर आपके पूंजीगत हानि को भी आगे के वर्षों में समायोजित नहीं कर पाएंगे जो कि आज की तारीख में कई आयकर दाताओं के पास या तो पूंजीगत लाभ या पूंजीगत हानि के रूप में आए एकत्रित होती है। और यदि आप निश्चित तिथि तक रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं जो की टीडीएस के रूप में विभाग के पास जमा टैक्स यदि वह आपके देय आयकर से अधिक है तो रिफंड भी रुक जाता है इसलिए समय पर रिटर्न दाखिल करें। और नियमों का पालन करें।



