आउटर की स्क्वायर फिट जमीनों की रजिस्ट्री हेक्टेयर दर पर कराने का सुनहरा अवसर
जब तक प्रशासन की नींद खुले तब तक हो जाएगा करोड़ों का खेल
रायगढ़। कभी-कभी जल्दी बाजी में प्रशासन और शासन से कुछ ऐसे निर्णय हो जाते हैं जिसका सीधा फायदा कुछ चतुर किस्म के लोगों को मिलता है। जो अपना एंटीना, नाक, कान, आँख, दिमाग खुला रखते हैं।
ऐसा ही एक निर्णय आया जब छत्तीसगढ़ शासन ने कुछ मातहत कर्मचारियों के आधे अधूरे अपरिपक्व सुझावों का अचार, मुरब्बा बनाकर नई गाइडलाइन जारी कर दी जिसका न केवल उन्हें तीखा विरोध झेलना पड़ा अपितु शासन को भी करोड़ों रुपए का चूना लग गया।
नई गाइडलाइन से पूर्व शहरों और सटे हुए गांव की जमीनों की रजिस्ट्री एक निश्चित मात्रा तक स्क्वायर फिट दर पर की जाती थी। लेकिन जल्दी बाजी में सारी जमीनों की गाइडलाइन दर में से स्क्वायर फीट को हटाकर हेक्टेयर दर लागू कर दी गई। बाद में जब अत्यंत विरोध हुआ तो उन्होंने फिर से जल्दी बाजी में एक गलत निर्णय लेते हुए नगर निगम के अंदर की जमीन 50 डिसमिल नगर पालिका के अंदर की जमीन साढ़े 37 डिसमिल और नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाली जमीन 25 डिसमिल तक पुराने मापदंडों के आधार पर स्लैब रेट में वापस डाल दी। परंतु तब तक इन पांच-छह दिनों में पूरे प्रदेश में कुछ चतुर सुजान लोगों ने रजिस्ट्रियां करवा ली और शासन को बैठे बिठाये करोड़ों रुपए का चूना लग गया।
जिला पंजीयक कार्यालय के अनुसार स्पष्ट मार्गदर्शन के अभाव में वे अभी प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार ही गणना कर रहे हैं ।जिसमें कालोनियों के अंदर स्कवेयर फिट दर और कालोनी से बाहर हेक्टेयर दर लागू है ।ऐसे में अब इसी आधे अधूरे निर्णय के कारण वर्तमान में शहर से सटे हुए गांव जो कि वस्तुत अत्यंत विकसित अवस्था में पहुंच चुके हैं जहां पर कई कालोनियां और कई बड़े सार्वजनिक निर्माण हो चुके हैं, जहां पर पहले स्क्वायर फिट दर से रजिस्ट्री होती थी उस पर शासन ने कोई निर्णय नहीं दिया।
जिसके कारण वापस एक लॉटरी खुलने की तरह चतुर सुजान लोग आसपास की जमीनों की रजिस्ट्री स्क्वायर फीट की जगह हेक्टेयर दर में धड़ाधड़ करवा रहे हैं और इसमें पंजीयन का कार्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अब 31 दिसंबर तक फिर से सुझाव मांगे गए हैं और जब तक इन सुझावों पर कोई निर्णय होता है तब तक आउटर की जमीन की रजिस्ट्री करने वालों की बल्ले बल्ले है। इसी को कहते हैं की जल्दी का काम कभी-कभी बहुत नुकसानदायक होता है।



